Carpenter Tools Name In Hindi | Chisel, Hand Drill Machine, Claw Hammer

Carpenter Tools Name In Hindi | Chisel, Hand Drill Machine, Claw Hammer, C Clamp, Pincer, Screw Driver In Hindi Information

बढ़ई के औजारों के नाम

बढ़ई का काम करने वाले को कारपेंटर कहते हैं, Engineering Field में कारपेन्ट्री व्यवसाय का विशेष महत्त्व है। यह कारखानों एवं व्यक्तिगत जीवन के लिए मुख्य आधार है। इस व्यवसाय की सहायता से जिन वस्तुओं को तैयार किया जाता है, सामान्यतया सभी कार्यों में प्रयोग की जाती है। कारपेंटर के अनेक प्रकार के औजार होते हैं हर कार्य के लिए अलग-अलग प्रकार के औजार का उपयोग किया जाता है, हम इस पोस्ट में बताने जा रहे कारपेंटर के सभी औजार के नाम ,और उनके मुख्य कार्य अगर यह पोस्ट आपको फायदेमंद लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें कारपेंटर (बढ़ई) भवनों के लिये दरवाजे, खिड़कियाँ, रोशनदान, अलमारियाँ आदि बनाता है तथा घर को सुंदर बनाने के लिए फर्नीचर, साज समान आदि तथा दुकानों, होटलों आदि का फर्नीचर तथा रूप सज्जा का कार्य तथा इन्डस्ट्रीज के लिये सांचों आदि का कार्य भी वही करता है। आज के जमाने में कारपेंटर का काम बहुत ही तेजी से बढ़ता जा रहा है, इसलिए कारपेंटर की भी मांग अधिक बढ़ती जा रही है।

Types of Carpenter Hand Tools Name

What Is Saw

लकड़ी को काटने के लिए जिस टूल का प्रयोग किया जाता है, उसे सॉ या आरी कहते है। लकड़ी काटते समय जब सॉ या आरी को अपनी ओर वापिस खींचते है, तभी कटिंग होती है। इसके दो मुख्य भाग होते है।

(1) ब्लेड

(2) हैंडल

इसका ब्लेड हाई कार्बन स्टील का बना होता है। इसके एक किनारे पर दाँते कटे होते है। आरी का साइज ब्लेड क़ी लम्बाई और प्रति सै.मी. दांतो क़ी संख्या से लिया जाता है। इसका हैंडल लकड़ी का बना होता है, जिसे ब्लेड के सिरे पर रिवटों द्वारा फिट किया होता है। ब्लेड अलग अलग आकृति मे बने होते है, जिनका प्रयोग अलग अलग प्रकार क़ी मोटी, बारीक व रेडियस क़ी कटिंग के लिए किया जाता है। यह निम्न प्रकार की होती है।

(1) रिप सॉ – इसका पॉइंट चिजल के पॉइंट की तरह होता है। इसका कोण 90 डिग्री होता है तथा इसमें 3 से 5 दांते प्रति इंच या 25 mm मे होते है।

(2) क्रॉस कट सॉ – इसकी आकृति रिप सॉ जैसी होती है। अंतर सिर्फ यह है कि इसका कोण 80 डिग्री से 82 डिग्री तक होता है इसका पॉइंट चाकू कि तरह होता है यह लकड़ी का बुरादा आगे कि ओर फेंकती है।

(3) टैनन सॉ – इसे वैक सॉ भी कहते है। यह 200 mm से 300 mm तक साइज मे होता है। इसकी बैक पर लोहे या पीतल की पत्ती लगी होती है इसमें 8-12 दांते प्रति इंच होते है इसके द्वारा आर पार कट नहीं लगाया जाता।

What Is Chisel

Chisel – लकड़ी मे सुराख निकालने कर लिए, उन्हें साफ करने के लिए लकड़ी मे विभिन्न प्रकार के जॉइंट ग्रूप बनाने, लकड़ी के ऊपर कढ़ाई करने तथा दूसरे विभिन्न कार्य करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। इसके निम्नलिखित भाग होते है।

(1) ब्लेड

(2) कटिंग एज

(3) कटिंग एंगल

(4) शोल्डर

(5) नैक

(6) हैंडल

इसका ब्लेड हाई कार्बन स्टील का बना होता है तथा आगे से इसमें एक तरफ धार होती है, जिसका ग्राइंडिंग कोण 15 डिग्री से 25 डिग्री तक होता है इसके उपरी सिरे पर लकड़ी का मजबूत हैंडल लगा होता है काम करते समय इसके ऊपर चोट लगाई जाती है या फिर दवाब के द्वारा ही इन्हें प्रयोग किया जाता है यह निम्नलिखित प्रकार की होती है।

Types of Chisel (चौरसी)

(1) सादा चौरसी

(2) बेवल एज चौरसी

(3) चोपिंग चिजल

(4) मोटाई चिजल

(5) लम्बी चौरसी

What Is Gouges

यह भी एक प्रकार की चौरसी ही है लेकिन इसकी धार गोलाई में होती है यह गोलाई अंदर की तरफ या बाहर की तरफ होती है जिनकी धार गोलाई बाहर से तेज होती है उसे फर्मर Gouges कहते है और जिसकी गोलाई अंदर से तेज होती है उसे उसे स्क्रइविंग गाउज कहते है।

What Is Planes (रन्दा)

लकड़ी की सतह को समतल बनाने के लिए रंदे का प्रयोग किया जाता है विभिन प्रकार की सतहों को समतल करने के लिए अलग अलग प्रकार के रंदे प्रयोग किये जाते है इसे प्लेनिंग टूल कहते है।

Types of Planes (रन्दा)

(1) जैक प्लेन – लकड़ी को समतल करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है इसके निम्नलिखित प्रमुख भाग होते है।

बॉडी , हैंडल , पच्चड , कटिंग प्लेट या ब्लेड , लोहे की प्लेट

इसका ब्लेड इसकी बॉडी में 45 डिग्री के कोण पर टेपर फिट होता है इसके लिए बॉडी में सुराख बना होता है ब्लेड को स्थिर फिट करने के लिए इसमें आयरन प्लेट और पच्चड का प्रयोग किया जाता है इसकी लम्बाई 300 मि.मी. तक और चौड़ाई व मोटाई 60 से 70 मि.मी. तक होती है।

(2) स्मूथिंग प्लेन – यह एक छोटे आकार का रन्दा होता है इसका प्रयोग जैक प्लेन द्वारा समतल सतह को स्मूथ बनाने के लिए किया जाता है इसकी बॉडी भी लकड़ी की बनी होती है।

(3) मेटल जैक प्लेन – यह एक लोहे की बनी बॉडी का बना हुआ रन्दा होता है आजकल इसका प्रयोग जादा तर किया जाता है इससे लकड़ी की फिनिशिंग की जाती है।

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What Is Hand Drill Machine

वर्कशॉप में प्रतिदिन छिद्र करने की आवश्यकता रहती है, अतः इन छिद्रों को बनाने के लिए जिस कटिंग टूल का प्रयोग किया जाता है उसे ड्रिल (Drill) अथवा बरमा कहते हैं। ड्रिल के द्वारा किसी भी धातु में गोल छिद्र किए जा सकते हैं। यह हाई कार्बन स्टील, हाई स्पीड स्टील के बने होते हैं।

बर्मी कमानी – यह लकड़ी की बनी होती है तथा इसमें अलग अलग साइज़ की बिट या फ्लेट ड्रिल फिट होती है इसे एक लकड़ी की छड़ द्वारा रस्सी की सहायता से घुमाया जाता है यह लकड़ी में सुराख करने के लिए बहुत प्रयोग की जाता है इसे काउंट्री ड्रिल भी कहते है।

Types of Drill

ड्रिल निम्न प्रकार के होते हैं
1. ऑयल होल ड्रिल (Oil Hole Drill)
2. स्ट्रेट फ्लूटेड ड्रिल (Straight Fluted Drill)
3. ट्विस्ट फ्लूटेड ड्रिल (Twist Fluted Drill)
4. टेपर गैंक कोर ड्रिल (Taper Shank Core Drill)
5. सेन्टर ड्रिल (Centre Drill)
6. फ्लैट ड्रिल (Flat Drill)

What Is Carpenter Hammer

कारपेन्ट्री में चीजलों (Chisels) से काम करने के दौरान प्रहार करने, लकडी या लोहे की कीलें ठोकने या जोड़ों को ठोकने के लिए चोट लगाने वाले औजार काम आते हैं। इनमें से कुछ औजार ऐसे भी होते हैं, जो चोट करने के साथ काटने का काम भी करते हैं. हथौडे/हैमर (Hammer) भिन्न-भिन्न पदार्थ के बनाए जाते हैं। फिटिंग शॉप में तथा मशीन शॉप में प्रयोग किए जाने वाले हथौड़े कास्ट स्टील व ड्रॉप फोर्ज कार्बन स्टील के बनते हैं। शीट मेटल वर्क में प्रयोग होने वाले हथौड़े रबर (Rubber), नायलॉन (Nylon), कठोर लकड़ी । (Hard Wood). प्लास्टिक (Plastic) आदि के बनाए जाते हैं। ज्यादा तर कारपेंटर शॉप मे बॉल पैन हैमर, स्ट्रेट पेन हैमर, ओर क्रॉस पेन हैमर कीलों को ठोकने के लिए या उन पर चोट लगाने के लिए प्रयोग किये जाते है जबकि कलॉ हैमर का प्रयोग कीलों को बाहर निकालने के लिए भी किया जाता है इसके एक तरफ फ्लैट फेस ओर दूसरी तरफ कट कटा हुआ पेन होता है, जिसे हॉर्न कहते है यह थोड़ा सा मुड़ा हुआ भी होता है।

Types of Hammer

1 क्लॉ हेमर (Claw Hammer)
2. स्लेज हैमर (Sledge Hammer)
3. पावर हैमर (Power Hammer)
4. सॉफ्ट हैमर (Soft Hammer)
5. हैण्ड हैमर (Hand Hammer)

What Is Carpenter Vice

हाथ के औजारों से गढ़ने के लिए लकड़ी को स्थिर रखना जरूरी होता है। धारक औजार द्वारा काम में ली जा रही लकड़ी को कसकर पकड़े रखना होता है, जिससे उस पर आसानी से कोई भी काम किया जा सके। बढ़ईगिरी के लिए सबसे पहले मेज या बैंच की जरूरत पड़ती है, जिस पर कार्यखण्ड जॉब को पकड़ने के लिए एक वाइस (Vice) लगी होती है।

What Is Sash Bar Clamp (शिकंजा)

इसका प्रयोग कारपेंटर सैक्शन मे दरवाज़े के पल्ले व चोखटो आदि को फिट करते समय किया जाता है यह माइल्ड स्टील का बना होता है इसके दो जॉ होते है इसका एक जॉ सीपडल के द्वारा तथा दूसरा जॉ एक पिन की सहायता से बार पर आगे पीछे फिट किया जाता है इसका साइज 50 cm से 150 cm तक होता है। इसे शेश क्रेम्प भी कहते है।

What Is C Clam

यह अंग्रेजी के C अछर के आकार का होता है इसकी बॉडी कास्ट आयरन की बनी होती है तथा इसका इसपिंडल माइल्ड स्टील का होता है इसका प्रयोग लकड़ी के दो पार्ट को आपस मे फिट करते समय दबाव देने के लिए किया जाता है।

What Is Pincer (पिन्सर)

इसे जंबूर भी कहते है लकड़ी मे कील लगाते समय कील टेड़ी न हो, इसके लिए पिन्सर का प्रयोग किया जाता है तथा लकड़ी मे से कील को बाहर निकालने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।

What Is Adze (बसूला)

कारपेंटर शॉप मे लकड़ी की मोटी छिलाई, कटाई करने के लिए तथा चिजल पर चोट लगाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

Main Operations In Carpenter Shop (Carpenter Information In Hindi)

कारपेंटर शॉप मे निम्नलिखित क्रियाए प्रमुख रूप से होती है।

(1) सॉइंग – लकड़ी को आरी द्वारा काटने की क्रिया को सॉइंग या चिराई कहते है। भारी लकड़ी, जो बड़े आकार की होती है, उसकी सॉइंग आरा मशीन पर की जाती है।

(2) मार्किंग – कारपेंटर शॉप मे भी फिटिंग शॉप की तरह कोई भी सामान बनाने के लिए लकड़ी के ऊपर ड्राइंग के अनुसार लाइन लगाई जाती है, इसके लिए मार्किंग गेज जैनी कैलीपर, डिवाइडर तथा सूत तेल से सना धागा का प्रयोग किया जाता है इसके अतिरिक्त मार्किंग के लिए पेन्सिल तथा एल स्क्वायर का प्रयोग भी किया जाता है।

(3) प्लेनिंग – लकड़ी को जैक प्लेन द्वारा समतल करने की क्रिया को प्लेनिंग या रंदाई कहते है। इससे लकड़ी की सतह साफ, समतल ओर चिकनी बन जाती है जो सुंदरता को भी बढ़ाती है।

(4) चिजलिंग – चौरसी या चिजल द्वारा लकड़ी के ऊपर जो कार्य किया जाता है, उसे चिजलिंग कहते है इस क्रिया मे चूल व सुराख निकाले जाते है।

(5) रिबेटिंग – खिड़कियो तथा दरवाजो के पल्लो को चोखटो मे फिट करने के लिए रिबेटिंग या पाताम की क्रिया करनी पडती है यह क्रिया एक विशेष प्रकार के रन्दे जिसे रिबेट प्लेन कहते है के द्वारा की जाती है।

(6) ड्रिंलिंग – लकड़ी मे सुराख करने की क्रिया को ड्रिलिंग कहते है यह क्रिया प्लेट ड्रिल, गिरमिट द्वारा की जाती है इसमें ड्रिल को रैचट ब्रेस व हैण्ड ड्रिल मशीन मे पकड़ कर प्रयोग किया जाता है।

different types of wood used in carpentry

(चीड़) Chil Wood In Hindi Information

चीड़ – यह पेड़ भी पहाड़ी इलाकों मे पाया जाता है इसका रंग हल्का, पीला भूरा होता है इससे तारपीन का तेल तथा गन्दा बिरोजा प्राप्त होता है इसका वजन 35 से 40 पोंड प्रति घन फुट तक होता है इसमें दीमक जल्दी लगती है इसका प्रयोग भारी कामों के लिए किया जाता है।

(कैल) Kail Wood In Hindi Information

कैल – यह पेड़ पहाड़ो मे होता है इसकी लकड़ी का रंग हल्का भूरा व सफेदी मे होता है इसका वजन 28 पोंड प्रति घन फुट होता है इसमें एक विशेष प्रकार का तेल होता है जिससे इसमें कीड़ा व दीमक आदि नहीं लगती इसका प्रयोग भवन निर्माण मे दरवाजे, खिड़किया तथा फनीचर बनाने के लिए करते है।

(शीशम) Sheesham Wood In Hindi Information

शीशम – यह भी एक पक्की लकड़ी है , जिसकी वजन 50 से 55 पोंड प्रति घन फुट तक होता है यह मैदानों में पाई जाती है यह काले भूरे रंग में होती है इसकी बाहरी लकड़ी सफेद होती है जिसमे कीड़ा लग जाता है जबकि अन्दुरुनी लकड़ी में कीड़ा नही लगता है इसका प्रयोग फनीचर बनाने तथा दुसरे कामो के लिए किया जाता है

(सागवान) Teak Wood In Hindi Information

सागवान – यह एक पक्की लकड़ी है तथा वजन में भी भारी होती है इसका वजन 45 से 50 पौंड प्रति घन फुट तक होता है इसका रंग गहरा पीला या सुनहरी होता है इसमें भी तेल होता है तथा कीड़ा नही लगता इसका प्रयोग उच्च कोटि का फनीचर बनाने के लिए प्रयोग में ली जाती है क्योकि इसके ऊपर धारियां पाई जाती है जहाँ सागवान होता है उसे वही का नाम दिया जाता है इसकी लकड़ी पर पोलिश तथा पेंटिंग अच्छी होती है

(आम) Mango Wood In Hindi Information

आम – यह आम में पाई जाने वाली लकड़ी है इसका रंग हल्का गुलाबी होता है इसका प्रयोग भवन निर्माण , प्लाईवुड बनाने तथा पेकिंग केस बनाने के लिए किया जाता है

(सन्दल) Sandal Wood In Hindi Information

सन्दल – यह एक भारी लकड़ी होती है इसका रंग हल्का भूरा होता है इसका वजन 50 से 60 पौंड प्रति घन फुट होता है यह लकड़ी बहुत ही मंहगी आती है इसलिए सन्दल का प्रयोग कीमती फनीचर बनाने के लिए किया जाता है

(अखरोट) Walnut Wood In Hindi Information

अखरोट – यह लकड़ी भी पहाड़ी में पाई जाती है इसका रंग हल्का कला भूरा होता है यह बहुत कीमती होती है इसलिए इसका प्रयोग उच्च कोटि का फनीचर बनाने के लिए किया जाता है इसका वजन 35 से 40 पौंड प्रति घन फुट होता है

(कीकर) Babool Wood In Hindi Information

कीकर – यह हलके पीले रंग की लकड़ी होती है इसका वजन भी 35 से 40 पौंड तक का होता है इसका प्रयोग भी फनीचर बनाने तथा छिलका चमड़ा रगने के काम आता है तथा इसके ओजरो के हेंडल बनाये जाते है

(पड़तल) Partal Wood In Hindi Information

पड़तल – यह पेड़ भी पहाड़ो पर पाया जाता है इसका रंग हल्का सफेद होता है इससे कोई तेल आदि नही निकलता है तथा इस पेड़ में गंध भी नहीं आती है इस लकड़ी का प्रयोग पैकिंग केस बनाने के लिए किया जाता है इसका वजन 20 से 25 पौंड प्रति घन फुट होता है

(शहतूत) Mulbary Wood In Hindi Information

शहतूत – यह एक हलकी लकड़ी होती है इसका वजन 20 पौंड प्रति घन फुट होता है इसका रंग पीला व सफेद होता है इसका प्रयोग खेलो (Sports Goods) का सामान बनाने के लिए किया जाता है

(साल) Sal Wood In Hindi Information

साल – यह भी एक भारी लकड़ी होती है इसका वजन 55 से 60 पौंड प्रति घन फुट होता है इसमें कीड़ा लग जाता है इसका प्रयोग किशितयों में किया जाता है

(देवदार) Deodar Wood In Hindi Information

देवदार – यह पेड़ भी पहाड़ो पर पाया जाता है यह सदा हरा रहने वाला पेड़ है इसकी लकड़ी का रंग हल्का सुनहरी होता है इस लकड़ी में विशेष प्रकार की बू स्मेल आती है इस पेड़ में कीड़ा और दीमक नही लगता है इसमें विशेष प्रकार का तेल होता है इस लकड़ी का प्रयोग भवन निर्माण व फनीचर बनाने के लिया किया जाता है इसके स्लीपर रेलवे लाइन बिछाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है इसका वजन 35 पौंड प्रति घन फुट होता है

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