ITI Diesel Mechanic Course in Hindi | डीजल मेकैनिक कोर्स की पूरी जानकारी

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ITI Diesel Mechanic Course in Hindi | डीजल मेकैनिक कोर्स की पूरी जानकारी | डीजल मैकेनिक किसे  कहते है ?

डीजल मैकेनिक किसे कहते है ? डीजल मेकैनिकल कोर्स की पूरी जानकारी, डीजल मैकेनिक कोर्स करने के बाद क्या करें 

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डीजल मैकेनिक किसे  कहते है ?

इस ट्रेड के नाम से ही पता चल  रहा है कि इसमे डीजल इंजन से संबंधित कार्य होता है। आईटीआईसे मैकेनिक्स (डीजल) का एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स करने के दौरान इंजन की देखभाल, गड़बड़ी से बचाव, खराबी में सुधार, मशीन एडजस्टमेंट, एलाइनमेंट समेत डीजल इंजन से जुड़े तमाम कार्यों की तकनीकी बारीकियां सिखाई जाती हैं डीजल मैकेनिक वह होता है जो डीजल इंजन के बारे में ,उसके औजारों के बारे में,उसके पार्ट्स की पहचान करना, इसकी असेंबल या डिसअसेंबल करना इन सभी के बारे में अच्छे से जानकारी रखता हो उसे ही डीजल मैकेनिक कहते है।

डीजल मैकेनिक का कार्य बसों, नावों, ट्रकों और बुलडोजर जैसे डीजल वाहनों के रखरखाव, मरम्मत और देखभाल करना होता हैं। हमारे आस पास बहुत से ऐसे वर्कशॉप दिखाई देते है जिसमे डीजल से चलने वाली गाड़ियों का मरम्मत कार्य होता है इन गाड़ियों को मरम्मत कार्य करने वाला भी एक डीजल मैकेनिक ही होता है। अतः डीजल मैकेनिकल कोर्स भी  आई टी आई के प्रमुख ट्रेडों में से एक है।जिसका डिमाण्ड आज के समय मे बहुत है।

योग्यता, प्रशिक्षण अवधि

ITI के डीजल मैकेनिक ट्रेड में एडमिशन लेने के लिए देश  के किसी भी बोर्ड से 10वी पास होनाआवश्यक है,मतलब आपका 10 वी के पाठ्यक्रम में गणित और विज्ञान होना चाहिए तभी आप इस ट्रेड में एडमिशन लेने योग्य है। डीजल मैकेनिक ट्रेड में प्रशिक्षण की अवधि 1 वर्ष की होती है इसमें 2 सेमेस्टर में एग्जाम होता है लेकिन अब लगभग हर जगह इस ट्रेड का एक बार ही एग्जाम (वार्षिक परीक्षा)हो रहा है।
जुलाई महीने में आई टी आई का फॉर्म आवेदन शुरू  होता है और सरकारी आई टी आई में  एडमिशन मेरिट के आधार पर होता है। अगर आपका 10 वी में अच्छा मार्क(नम्बर) है तो आपको  सरकारी आई टी आई में एडमिशन मिल सकता है। प्राइवेट आई टी आई में एडमिशन ऑफलाइन भी मिल जाता है मतलब आप किसी प्राइवेट आई टी आई में जाकर भी अपना एडमिशन ले सकते है ।लेकिन हर प्राइवेट आई टी आई में डीजल मैकेनिक का कोर्स उपलब्ध नही होता है।तथा फीस भी सरकारी आई टी आई से ज्यादा लगता है।  अतः एडमिशन लेने से पहले उस आई टी आई में अपने अपने इस कोर्स के  बारे में पता कर ले ।

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NCVT और SCVT में क्या अंतर है, कौन बेहतर है ?

एनसीवीटी का मतलब नेशनल काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग होता है, यह काउंसिल राष्ट्रीय स्तर पर काम करता है मतलब पूरे भारत भर के लिए और आसान भाषा में कहें तो वोकेशनल ट्रेनिंग का मतलब व्यवसायिक प्रशिक्षण होता है।

एनसीवीटी का फुल फॉर्म – नेशनल काउंसिल आफ वोकेशनल ट्रेनिंग होता है।

NCVT सर्टिफिकेट के माध्यम से आप इंडिया लेवेल का फॉर्म आवेदन कर सकते है जबकि SCVT सर्टिफिकेट राज्य  लेवेल का होता है इस सर्टिफिकेट के माध्यम से आप राज्य लेवल का ही फॉर्म आवेदन कर सकते है। लेकिन कभी कभी किसी सरकारी आवेदन में NCVT और SCVT सर्टिफिकेट दोनो से आवेदन करने का मौका मिलता है। NCVT सर्टिफिकेट की वैल्यू ज्यादा होती हैं.

एससीवीटी का फुल फॉर्म – स्टेट काउंसिल आफ वोकेशनल ट्रेनिंग

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डीजल मैकेनिक कोर्स करने के बाद क्या करें ?

कोई भी कोर्स हो वो अच्छा या बुरा नहीं होता है। सभी कोर्स अपने जगह पर अच्छे हैं ।आप इस कोर्स को करने के बाद रेलवे के लिए apply कर सकते है या किसी भी और आप इस कोर्स को करने के बाद private jobe भी कर सकते है। आप जो भी करोगे ये आपके ऊपर डिपेंड करता है । की आप को क्या करना है प्राइवेट कंपनी में डीजल मैकेनिक की भी काफी मांग होती है

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आईटीआई अप्रेंटिस क्या है ? आईटीआई अपरेंटिसशिप की पूरी जानकारी

जब भी आप किसी भी अप्रेंटिस भर्ती के बारे में देखते हैं जो आपके सबसे पहले मन में यह सवाल आता है कि ये अप्रेंटिस क्या है ? तो चलिए आपको बताते हैं कि अप्रेंटिस क्या है। अप्रेंटिस का अर्थ है प्रशिक्षु और अप्रेंटिसशिप का अर्थ है प्रशिक्षण। यह एक प्रकार की प्रशिक्षण प्रणाली है जिसमे प्रशिक्षु को नौकरी के सारे तौर-तरीके सिखाये जाते हैं। इसमें प्रशिक्षुओं को किसी संस्था, कंपनी आदि में काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसका डिमांड प्राइवेट और सरकारी दोनो सेक्टर में होता है।

अप्रेंटिसशिप एक साल का कोर्स  होता है जिसमे आपको अपने ट्रेड से सम्बंधित सारी जानकारी दी जाती है जिसके माध्यम से आप अपने ट्रेड में एक्सपर्ट हो जाते है। अप्रेंटिसशिप के दौरान आपको स्टेपिंड के रूप में 8000 से 10000 रुपए तक महीना  मिलता है।

सुरक्षा सावधानियाँ (Safety & Precautions)

  1. स्वयं की सुरक्षा  (Self Safety)
  2. औजारों की सुरक्षा (Tool Safety)
  3. मशीन की सुरक्षा (Machine Safety)
  4. विद्युत संबंधी सावधानियां (Electrical Safety)
  5. सामान्य सुरक्षा (General Safety)

 स्वयं की सुरक्षा(Self Safety) 

1. वर्कशॉप में कार्य करते समय जूतों का प्रयोग करना चाहिए। 
2. वर्कशॉप में कार्य करते समय ढीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए, केवल टाइट यूनिफार्म होनी चाहिए।
3. वर्कशॉप में कार्य करते समय घड़ी, टाई, चैन, बेल्ट आदि नहीं पहनना चाहिए।
4. जिस मशीन के बारे में आपको जानकारी नहीं है, उस मशीन को चालू नहीं करना चाहिए।
5. चलती हुई मशीन की मरम्मत नहीं करनी चाहिए।
6. वर्कशॉप के अंदर अगर चश्मा, हेलमेट आदि उपलब्ध है, तो उनका प्रयोग जरूर करना चाहिए।
7. कार्यशाला में कार्य करते समय किसी साथी के साथ साथ हंसी-मजाक बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
8. चालू मशीन या चालू इंजन के नीचे काम करने के लिए नहीं घुसना चाहिए।
9. मशीन या इंजन पर कार्य करते समय अपनी शर्ट की बाहे ऊपर कर लेनी चाहिए।

 औजारों की सुरक्षा(Tool safety) 

1. कार्यशाला में काम करने से पहले सभी औजारों के बारे में पूरी तरह जानकारी होनी चाहिए ।
2. नापने वाले(Measuring Tool) या फिर काटने वाले(Cutting Tool) औजारों को एक साथ नहीं रखना चाहिए।
3. औजारों को उपयोग में लेने से पहले ओर बाद में उन्हें अच्छे तरीके से साफ करके रखना चाहिए।
4. औजारों को ग्रीस और तेल इत्यादि में नहीं लगाना चाहिए
5. यदि किसी औजार की जरूरत नहीं है, तो उसे टूल बस में रख देना चाहिए।
6. बिना हैंडल वाले औजारों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
7. खराब औजारों को काम में नहीं लेना चाहिए।

 मशीन की सुरक्षा(Machine Safety) 

1. जिस मशीन को हमें चालू करना है, उसके बारे में हमें पूरी जानकारी होनी चाहिए।
2. वर्कशॉप में रखी हुई मशीनों को हमें प्रतिदिन साफ करना चाहिए, ताकि वह सुरक्षित रहे और खराब नहीं हो।
3. जिस मशीन को लुब्रिकेशन की आवश्यकता है, उसके लुब्रिकेशन का पूरा ध्यान रखना चाहिए और जिस मशीन में कूलिंग की आवश्यकता है, उसमें कूलिंग का ध्यान रखना चाहिए।
4. बिना जरूरत मशीन को नहीं चलाना चाहिए।
5. चालू मशीन को छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
6. जिस मशीन में से आवाज आती है। या फिर कोई नट बोल्ट लूज़ है, तो हमें उसे आवश्यकतानुसार टाइट कराना चाहिए।
7. मशीन पर कार्य करते समय यह पता होना चाहिए की मशीन सही से कार्य कर रही है या फिर नहीं और अगर नहीं कर रही तो उसकी मरम्मत करानी चाहिए।
8. आवश्यकतानुसार मशीन पर डेंजर खतरा लिखा होना चाहिए या फिर लिख देना चाहिए।
9. कार्यशाला में लगी मशीनों पर सुरक्षा कवच लगा होना चाहिए। 

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