टर्नर किसे कहते है ? ITI Turner Course Details In Hindi

ITI Turner Course

टर्नर किसे कहते है ? ITI Turner Course Details In Hindi आईटीआई टर्नर कोर्स क्या होता है | आईटीआई टर्नर कोर्स कैसे करें

टर्नर किसे कहते हैं | आईटीआई टर्नर कोर्स क्या होता है | आईटीआई टर्नर कोर्स कैसे करें

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टर्नर किसे कहते है?

टर्नर के अंदर एक एसी मशीन प्रयोग की जाती है जो लेथ मशीन की सहायता से किसी धातु या लकड़ी के टुकड़े को उसका  सही आकार देने का कार्य करता है उसे ही टर्नर कहते हैं। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कही पर किसी वस्तु का मैनुफैक्चरिंग कार्य चल रहा है लेकिन किसी कारण बस उस वस्तु की सेप उचित तरीके से नही हो रहा है तो उसे एक टर्नर कारीगर ही लेथ मशीन का प्रयोग  कर उसका सही आकार देने का कार्य करता है।टर्नर ट्रेड ITI का एक इंजीनियरिंग कोर्स है जो  मैनुफेक्चरिंग तथा प्रोडक्शन कैटेगरी में आता है। लेथ मशीन-ऐसी मशीन जो किसी  धातु या लकड़ी के टुकड़े को उचित आकार देने का कार्य करती हो उसे लेथ मशीन कहते है।

टर्नर ट्रेड करने की योग्यता, कोर्स की अवधि

 ITI के ज्यादा तर कोर्स को करने की योग्यता 10 वी पास होती है इससे ज्यादा योग्यता  की जरूरत नही होती है।टर्नर कोर्स को करने के लिए 10 वी पास होना आवश्यक होता है अगर आप 10वी गणित और विज्ञान विषयो के साथ पास किये हो तो आप इस कोर्स को कर सकते है। यह  बात आपको पता ही होगा कि ITI के सभी कोर्स की अवधि एक समान नही होता है।इनकी अवधि  6 महीने से लेकर 2 साल तक होती है ।
इसी प्रकार टर्नर कोर्स  की अवधि 2 वर्ष की होती है इन दो वर्षों में आप लेथ मशीन और सारी मशीनों  को चलाना सिख जाते है। लेकिन पूर्ण रूप से प्रैक्टिकली ज्ञान आपको किसी कंपनी या वर्कशॉप से ही मिलता है।

 टर्नर कोर्स में  एडमिशन लेने की प्रक्रिया

 ITI के किसी भी कोर्स में एडमिशन लेने ली लिए  सबसे पहले उसका फॉर्म ऑनलाइन  करना पड़ता है जो जुलाई महीने में शुरू होता है। उसके बाद काउन्सलिंग की बारी आती है। कॉउंसलिंग के आधार पर ही आपका इस ट्रेड में एडमिशन मिलता है। अगर आप 10 वी अच्छे अंक से पास किये है तो आपको इस ट्रेड में एडमिशन आसानी से मिल जायेगा।  एक बात और कही कही प्राइवेट ITI में आपको उस संस्थान में जाकर डायरेक्ट एडमिशन मिल जाता है। लेकिन सरकारी में एडमिशन के लिए पहले फॉर्म ऑनलाइन करना पड़ता है।

Turner Course Details

टर्नर कोर्स करने के बाद क्या करे।

 ITI कम्पलीट होने के बाद आपके पास कई सारे विकल्प होते है जैसे कि अगर आगे और  पढ़ाई करना चाहते हैं तो आप पॉलीटेक्निक डिप्लोमा  के 2nd ईयर में  मैकेनिकल ट्रेड में एडमिशन ले सकते है वैसे पॉलीटेक्निक डिप्लोमा  तीन वर्ष का कोर्स होता है। इसके बाद आप इंजीनियरिंग में स्नातक(B. Tech) भी कर सकते है। या आप किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब कर सकते है या अप्रेंटिसशिप कर सकते है .

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ITI Turner में कौन कौन से Subjects होते है ?

आईटीआई टर्नर में 5 सब्जेक्ट्स होते है

  • टर्नर ट्रेड थ्योरी
  • वर्कशॉप कैलकुलेशन एंड साइंस
  • इंजीनियरिंग ड्राइंग
  • एम्प्लोयाबिलिटी स्किल्स
  • ट्रेड प्रैक्टिकल

NCVT और SCVT में क्या अंतर है, कौन बेहतर है ?

एनसीवीटी का मतलब नेशनल काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग होता है, यह काउंसिल राष्ट्रीय स्तर पर काम करता है मतलब पूरे भारत भर के लिए और आसान भाषा में कहें तो वोकेशनल ट्रेनिंग का मतलब व्यवसायिक प्रशिक्षण होता है।

एनसीवीटी का फुल फॉर्म – नेशनल काउंसिल आफ वोकेशनल ट्रेनिंग होता है।

NCVT सर्टिफिकेट के माध्यम से आप इंडिया लेवेल का फॉर्म आवेदन कर सकते है जबकि SCVT सर्टिफिकेट राज्य  लेवेल का होता है इस सर्टिफिकेट के माध्यम से आप राज्य लेवल का ही फॉर्म आवेदन कर सकते है। लेकिन कभी कभी किसी सरकारी आवेदन में NCVT और SCVT सर्टिफिकेट दोनो से आवेदन करने का मौका मिलता है। NCVT सर्टिफिकेट की वैल्यू ज्यादा होती हैं.

एससीवीटी का फुल फॉर्म – स्टेट काउंसिल आफ वोकेशनल ट्रेनिंग

ITI Turner Course Details In Hindi

आईटीआई अप्रेंटिस क्या है ? आईटीआई अपरेंटिसशिप की पूरी जानकारी

जब भी आप किसी भी अप्रेंटिस भर्ती के बारे में देखते हैं जो आपके सबसे पहले मन में यह सवाल आता है कि ये अप्रेंटिस क्या है ? तो चलिए आपको बताते हैं कि अप्रेंटिस क्या है। अप्रेंटिस का अर्थ है प्रशिक्षु और अप्रेंटिसशिप का अर्थ है प्रशिक्षण। यह एक प्रकार की प्रशिक्षण प्रणाली है जिसमे प्रशिक्षु को नौकरी के सारे तौर-तरीके सिखाये जाते हैं। इसमें प्रशिक्षुओं को किसी संस्था, कंपनी आदि में काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसका डिमांड प्राइवेट और सरकारी दोनो सेक्टर में होता है।

अप्रेंटिसशिप एक साल का कोर्स  होता है जिसमे आपको अपने ट्रेड से सम्बंधित सारी जानकारी दी जाती है जिसके माध्यम से आप अपने ट्रेड में एक्सपर्ट हो जाते है। अप्रेंटिसशिप के दौरान आपको स्टेपिंड के रूप में 8000 से 10000 रुपए तक महीना  मिलता है।

सुरक्षा सावधानियाँ (Safety & Precautions)

  1. स्वयं की सुरक्षा  (Self Safety)
  2. औजारों की सुरक्षा (Tool Safety)
  3. मशीन की सुरक्षा (Machine Safety)
  4. विद्युत संबंधी सावधानियां (Electrical Safety)
  5. सामान्य सुरक्षा (General Safety)

 स्वयं की सुरक्षा(Self Safety) 

1. वर्कशॉप में कार्य करते समय जूतों का प्रयोग करना चाहिए। 
2. वर्कशॉप में कार्य करते समय ढीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए, केवल टाइट यूनिफार्म होनी चाहिए।
3. वर्कशॉप में कार्य करते समय घड़ी, टाई, चैन, बेल्ट आदि नहीं पहनना चाहिए।
4. जिस मशीन के बारे में आपको जानकारी नहीं है, उस मशीन को चालू नहीं करना चाहिए।
5. चलती हुई मशीन की मरम्मत नहीं करनी चाहिए।
6. वर्कशॉप के अंदर अगर चश्मा, हेलमेट आदि उपलब्ध है, तो उनका प्रयोग जरूर करना चाहिए।
7. कार्यशाला में कार्य करते समय किसी साथी के साथ साथ हंसी-मजाक बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
8. चालू मशीन या चालू इंजन के नीचे काम करने के लिए नहीं घुसना चाहिए।
9. मशीन या इंजन पर कार्य करते समय अपनी शर्ट की बाहे ऊपर कर लेनी चाहिए।

 औजारों की सुरक्षा(Tool safety) 

1. कार्यशाला में काम करने से पहले सभी औजारों के बारे में पूरी तरह जानकारी होनी चाहिए ।
2. नापने वाले(Measuring Tool) या फिर काटने वाले(Cutting Tool) औजारों को एक साथ नहीं रखना चाहिए।
3. औजारों को उपयोग में लेने से पहले ओर बाद में उन्हें अच्छे तरीके से साफ करके रखना चाहिए।
4. औजारों को ग्रीस और तेल इत्यादि में नहीं लगाना चाहिए
5. यदि किसी औजार की जरूरत नहीं है, तो उसे टूल बस में रख देना चाहिए।
6. बिना हैंडल वाले औजारों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
7. खराब औजारों को काम में नहीं लेना चाहिए।

 मशीन की सुरक्षा(Machine Safety) 

1. जिस मशीन को हमें चालू करना है, उसके बारे में हमें पूरी जानकारी होनी चाहिए।
2. वर्कशॉप में रखी हुई मशीनों को हमें प्रतिदिन साफ करना चाहिए, ताकि वह सुरक्षित रहे और खराब नहीं हो।
3. जिस मशीन को लुब्रिकेशन की आवश्यकता है, उसके लुब्रिकेशन का पूरा ध्यान रखना चाहिए और जिस मशीन में कूलिंग की आवश्यकता है, उसमें कूलिंग का ध्यान रखना चाहिए।
4. बिना जरूरत मशीन को नहीं चलाना चाहिए।
5. चालू मशीन को छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
6. जिस मशीन में से आवाज आती है। या फिर कोई नट बोल्ट लूज़ है, तो हमें उसे आवश्यकतानुसार टाइट कराना चाहिए।
7. मशीन पर कार्य करते समय यह पता होना चाहिए की मशीन सही से कार्य कर रही है या फिर नहीं और अगर नहीं कर रही तो उसकी मरम्मत करानी चाहिए।
8. आवश्यकतानुसार मशीन पर डेंजर खतरा लिखा होना चाहिए या फिर लिख देना चाहिए।
9. कार्यशाला में लगी मशीनों पर सुरक्षा कवच लगा होना चाहिए। 

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